Thursday, May 23, 2024
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भारत की यात्रा (1947-2022) 75 वर्ष आज़ादी महोत्सव

भारत की यात्रा अंग्रेज़ो के कारण एक गरीब, आश्रित, अविकसित, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े राष्ट्र के रूप में छोड़ दिया था | अनेकों संघर्षो के बाद हमें अपना भारत स्वतंत्र मिला और स्वतंत्रता न केवल व्यक्तिगत, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्वतंत्रता के सपने भी लेकर आई इस वर्ष भारत को आज़ादी प्राप्त किए हुए 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं |और स्वतंत्र  भारत की यात्रा में 75 वर्ष में सोच-विचार, तकनीक, विज्ञानं, कला, साहित्य और सेना आदि सभी में अनेको परिवर्तन हुए | आज इन्हीं परिवर्तनों पर चर्चा करेंगे हम इस आर्टिकल में | और समझेंगे की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत की यात्रा के दौरान किस क्षेत्र में कितना विकास किया और कितनी सफलता प्राप्त की | 

स्वतंत्रता के बाद भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास

भारतीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं के जनक के रूप में लोकप्रिय शांति स्वरूप भटनागर की शुरुआत के कारण स्वतंत्रता प्राप्ति के 3 वर्ष बाद ही 1950 में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) का भी विस्तार किया | और आज भारत 

दुनिया में प्रौद्योगिकी लेनदेन के लिए सबसे आकर्षक निवेश स्थलों में तीसरे स्थान पर है| भारत वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष देशों में से एक है, जो अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में शीर्ष पांच देशों में से एक है। देश ने नियमित रूप से अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम दिया है, जिसमें चंद्रमा के मिशन और प्रसिद्ध ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) शामिल हैं। भारत औद्योगीकरण और तकनीकी विकास में खुद को गति प्रदान करते हुए विकास की  दिशा में सकारात्मक रूप से काम कर रहा है।

आजादी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था का इतिहास

भारत की स्वतंत्रता अपने आप में आर्थिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। ब्रिटेन द्वारा लगातार गैर-औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप देश निराशाजनक रूप से एक गरीब राष्ट्र था | इस गरीबी को मिटाने के लिए  ही 1948 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव ने मिश्रित अर्थव्यवस्था का प्रस्ताव रखा। राजनीतिक नेतृत्व का मानना ​​​​था कि चूंकि बाजार अर्थव्यवस्था में योजना बनाना संभव नहीं था, इसलिए राज्य और सार्वजनिक क्षेत्र अनिवार्य रूप से आर्थिक प्रगति में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। भारत ने योजना आयोग की स्थापना 1950 में की थी, जो संसाधनों के आवंटन, कार्यान्वयन और पंचवर्षीय योजनाओं के मूल्यांकन सहित योजना की पूरी श्रृंखला की देखरेख करता था। पंचवर्षीय योजनाएँ सोवियत संघ में प्रचलित योजनाओं के आधार पर केंद्रीकृत आर्थिक और सामाजिक विकास कार्यक्रम थीं। 1951 में शुरू की गई भारत की पहली पंचवर्षीय योजना, कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि और सिंचाई पर केंद्रित थी क्योंकि भारत खाद्यान्न आयात पर कीमती विदेशी भंडार खो रहा था। यह हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित था जिसने उच्च बचत और निवेश के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की मांग की थी। यह योजना सफल रही, जिसमें अर्थव्यवस्था 2.1% के लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए वार्षिक 3.6% की दर से बढ़ रही थी। दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61) ने भारत की दीर्घकालिक विकास को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए आर्थिक आधुनिकीकरण की नींव रखी। 1956 में शुरू किया गया और यह महालनोबिस मॉडल पर आधारित था जिसने भारी उद्योगों और पूंजीगत वस्तुओं पर ध्यान देने के साथ तेजी से औद्योगीकरण की वकालत की। प्रशांत चंद्र महालनोबिस भारतीय विकास योजना के निर्देशन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। वह 1955 से आयोग के मुख्य सलाहकार थे, उन्होंने भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की, और उन्हें भारत में आधुनिक सांख्यिकी का जनक माना जाता है। महालनोबिस योजना एक प्रकार से स्वदेशी या आत्मनिर्भरता की भावना का आह्वान थी। इसके बाद अनेक योजनाओं ने आकर भारत की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान जारी रखा इसमें मुख्य योजनाएं थी :- हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी पर बहुउद्देशीय परियोजना, हरित क्रांति, सदाबहार क्रांति, नोटबंदी, भारत को एक देश, एक बाजार बनाने वाली व्यापक कर व्यवस्था(GST), स्टार्टअप् आदि सभी योजनाएं नए भारत की नयी अर्थव्यवस्था को नयी सोच को अपनाने की प्रेरणा देती है और विकास को निरंतर साथ लेकर चलती है | 

भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पिछले 75 वर्षों में विकास 

प्राचीन काल से भारत में स्वास्थ्य सेवा चली आ रही है | वेदों और चरक संहिता जैसे हमारे शास्त्रों में इसे शामिल किया गया है। और भारत स्वतंत्रता के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में सभी का विशेष ध्यान था | और दवाइयां व अन्य जांच उपकरण को भारत में लाना व अन्य स्वास्थ्य सम्बंधित ज्ञान का प्रचार मुख्य रूप से किया गया | 1947 में औसत भारतीय की जीवन प्रत्याशा को 32 वर्ष से बढ़ाकर 2018 में 69.09 वर्ष करना। आजादी से पहले, फार्मा क्षेत्र का ढांचा और दवाइयों का आयात एक मात्रा तक ही सीमित था। उन्नत जेनेरिक दवाइयों  के लिए देश में कोई बड़ा विनिर्माण का साधन नहीं था, साथ ही विकास दर न्यूनतम थी। स्वतंत्रता के बाद पूरे ढांचे में निहित विभिन्न संशोधनों के बाद भारत एक प्रमुख दवा विकास का गवाह है। आज, भारत अपनी थोक दवा की आवश्यकता का लगभग 95% देश के भीतर से पूरा कर सकता है। सभी ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं के लिए प्रमुख फॉर्म्युलेशन आज यहां भारत में ही किए जाते हैं।

आज, फार्मा उद्योग विटामिन, एंटीबायोटिक्स सहित सभी प्रकार की दवाओं का उत्पादन कर सकता है। चिकित्सा पेशेवरों और वैज्ञानिकों के पास दवा बनाने की पूरी श्रृंखला और प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए पर्याप्त कौशल है। समग्र बाजार कारोबार में वृद्धि और निर्यात में वृद्धि इस क्षेत्र में परिणामी प्रगति का प्रतीक है। और आज भी भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में ध्यान निरंतर केंद्रित है | 

 स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतीय सेना में विकास 

विश्व के हर देश के रक्षक उस देश की सेना होती है | जिससे उस देश की रक्षा सुनिश्चित होती है | भारत की यात्रा में सेना स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले ब्रिटिश इंडिया के अंतर्गत कार्येगत थी परन्तु स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारतीय सेना पूर्ण रूप से भारत में शामिल हो गयी | भारतीय सेना अपने देश का सुरक्षा कवच है | जिसकी वजह से देश में हमले के दौरान देश की सुरक्षा सुनिश्चित होती है | भारतीय सेना देश का अभिमान और गौरव है | स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब पाकिस्तान द्वारा देश पर हमला हुआ कश्मीर को लेकर तब हमारी सेना ने ही देश को बचाया था और इसके बाद प्रत्येक युद्ध जैसे :- भारत पाकिस्तान युद्ध (1965) (1971), इंडिया सियाचिन वॉर (1984) , कारगिल युद्ध (1999) सभी में भारतीय सेना ने देश को गौरान्वित किया है | स्वतंत्र देश से पहले सेना के पास हथियार सीमित थे और एडवांस नहीं थे | परन्तु स्वतंत्रता के बाद भारत में अनेकों नए हथियार का आयात व विनिर्माण भी प्रारम्भ किया| फाइटर एयरक्राफ्ट su-47, ब्रहम-मोस ( सुपरसोनिक क्रूज), भाभा कवच (बुलेटप्रूफ वेस्ट), CBRN सूट( केमिकल,बायोलॉजिकल,नुक्लिअर रेडिएशन सूट), पिस्तौल ऑटो 9 mm 1A ( सेमि ऑटोमैटिक), 12 बोर PAG, 1B1 INSAS, विध्वंसक (राइफल), मशीन गन 1A, INSAS LMG(मशीन गन ), MSMC(सब-मशीन गन) ARDE 40 MM UBGL(ग्रेनेड लांचर), अर्जुन, भीष्मा ( मेन बैटल टैंक ) आदि सभी का निर्माण अब भारत में ही होता है, सेना को उनकी ज़रूरत के सभी हथियार या उपकरण अब भारत में ही निर्माण के लिए सभी को प्रोत्साहित किया जा रहा है और स्वतंत्र भारत में सेना को और सर्वश्रेष्ट बनाने के लिए देश अपना पूर्ण ध्यान केंद्रित कर रहा है | और इसी प्रकार आगे भी ध्यान देता रहेगा | 

और पढ़े :- मेटावर्स  क्या है और कैसे काम करता है

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